पलाश 


१५ नवम्बर सन २००० तीन राज्य बने : उत्तराखंड, छत्तीसगढ़ और झारखण्ड | 

उत्तराखंड जो कि उत्तरप्रदेश से अलग हुआ. छत्तीसगढ़ जो मध्यप्रदेश से अलग हुआ. 

झारखण्ड जो बिहार से अलग हुआ. 

बात करूँगा जहरखांड की जो बिहार से अलग होकर अपनी अलग पहचान बनाने की कोशिश कर रहा है. और मेरी मानो तो बहुत हद तक सफल भी रहा. 
भगवान् बिरसा जिस धरती में जन्म लिए उस धरती को  करने को हमेशा आगे रहता हूँ. जहाँ के जंगल इतने हरे भरे हैं कि लगता है प्रकृति बस यही है और कही नहीं. 
झारखण्ड कई तरह से उन्नति की राह पर अग्रसर है. आज के इस नए दौर के साथ कदम से कदम मिलकर चलने वाला झारखण्ड कई बुलंदियां छू रहा है. 
यहाँ की खूबसूरती मानो आपको एक अलग ही सुकून देती हो. यहाँ की नदियां, झरने जंगल, वन्य जीवन, प्रकृति का सौंदर्य मानो बस यही ज़िंदगी है. 
चैत्र के महीने में पलाश के फूल ऐसे  केसरिया रंग बिखेरती है जैसे जीवन का रंग हो. पलाश झारखण्ड की राजकीय फूल है और जो भी इसे एक बार इन वादियों में एक बार निहार ले यही का हो कर रह जाय. 



जोन्हा जलप्रपात सबसे ज्यादा घूमने वाला जलप्रपात क्योकि जोन्हा जलप्रपात आना हुंडरू जलप्रपात आने से ज़रा आसान है.

 जोन्हा जलप्रपात और हुंडरू जलप्रपात रांची शहर से लगभग ३५ किमी है. जोन्हा आने से आप सीता जलप्रपात भी पास में देख सकते हैं. रांची शहर से जो पुरुलिया जाने वाली मुख्या मार्ग हैं उसपर होकर जाना पड़ता है. दशम जलप्रपात भी एक बहुत ही अच्छी जगह है घूमने के लिए जो कि रांची शहर से जमशेदपुर जाने वाले मुख्या मार्ग से होकर जाती है, इस मार्ग पर आपको देवड़ी मंदिर भी मिल जाती है जो बहुत ही पवित्र स्थल माना जाता है.
इस मंदिर में हमारे भारतिय क्रिकेट के कप्तान महेंद्र सिंह धोनी कई बार पुजा कर चुके हैं. २०११ का क्रिकेट विश्व विजेता बनने  धोनी ने इसी मंदिर में पूजा अर्चना की थी. तब से यह मंदिर और भी ज्यादा लोकप्रिय हो चुकी है. 

झारखण्ड घूमने का सबसे अच्छा समय होता है नवम्बर से लेकर मार्च महीने तक.  





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